वो जो हम में तुम में क़रार था, तुम्हे याद हो के न याद हो,
वही यानि वादा-निबाह का, तुम्हे याद हो के न याद हो।
वो नए गिले, वो शिकायतें, वो मज़े मज़े की हिकायतें,
वो हर एक बात पे रूठना, तुम्हें याद हो के न याद हो।
कोई बात ऐसी अगर हुई, जो तुम्हारे जी को बुरी लगी,
वो बयाँ से पहले ही भूलना, तुम्हे याद हो के न याद हो।
कभी हम में तुम में भी चाह थी, कभी हम से तुम से भी राह थी,
कभी हम भी तुम भी थे आशना, तुम्हे याद हो के न याद हो।
वो जो लुत्फ़ मुझ पे थे बेशतर, वो करम के हाथ मेरे हाथ पर,
मुझ सब है याद जरा-जरा, तुम्हे याद हो के न याद हो।
जिसे आप गिनते थे आशना, जिसे आप कहते थे बा-वफ़ा,
मैं वही हूँ मोमिन'-ए- मुबतला, तुम्हे याद हो के न याद हो ।
मोमिन ख़ान मोमिन✍️

